बच्चा चोरी गैंग का 72 घंटे की भीतर भांडाफोड़
सोती मां के बगल से चुरा ले गए बच्चा-
हरिद्वार। आपको लेख लंबा लगे लेकिन बड़ी वारदात आखिर घटी कैसे? आपका ये जानना जरुरी है ताकी आप समझ सकें कि आम नागरिक होने के नाते ऐसे आपराधिक तत्वों से बचने के लिए आपको क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
सोती मां के बगल से चुरा ले गए बच्चा-
10 अक्टूबर 2025 की देर रात ज्योतिबा फुले नगर निवासी दंपत्ति अपने तीन माह के नवजात शिशु को लेकर कलियर पहुंचे और रात बिताने के लिए पास ही एक दुकान के बाहर रुक गए। अचानक उनके पास दो अंजान महिलायें पहुंची और बताया कि कुछ लोग उनके साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। सहानुभूति दिखाते हुए उन्हे अपने पास बैठा दंपत्ति ने उनसे बातचीत शुरु की तो उन महिलाओं ने जान पहचान बढ़ाते हुए घुलना-मिलना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद उनमें से एक महिला ने चाय पीने की ख्वाहिश जताई तो उसे सुरक्षित महसूस कराने के लिए बच्चे का पिता उसके साथ चाय की दुकान में चला गया। जब वह अकेले वापस लौटा तो बच्चा और दूसरी महिला गायब थे और पत्नी नींद के आगोश में थी।
वारदात पर गंभीर कप्तान ने गठित की टीम-
प्रकरण की जानकारी मिलते ही कप्तान प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने तुरंत मुकदमा दर्ज करने के आदेश देते हुए कलियर सहित आसपास के थानों की संयुक्त टीमें गठित कर बच्चे की जल्द तलाशने के सुस्पष्ट निर्देश जारी करते हुए टेक्निकल सपोर्ट की जिम्मेदारी सीआईयू रुड़की को सौंपी।
पड़ताल में पूरी बच्चा चोरी चेन लगी हाथ-
जुटाए गए मैनुअल एवं डिजिटल साक्ष्यों का पीछा करते हुए पुलिस टीम मेरठ पंहुची तो उनके हाथ इस पूरी वारदात की एक अहम कड़ी लगी जिसका नाम था आस मोहम्मद लंगड़ा। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पहले आस मौहम्मद की पत्नी (अज्ञात महिलाओं में से एक) और फिर दूसरी अज्ञात महिला) तक पहुंची और उनसे पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पूछताछ की। इसके बाद पुलिस टीम ने 02 अन्य महिलाओं और बच्चे के अन्तिम खरीददार को दबोचा।
सौदे की वजह बच्चा न होना-
पुलिस की पकड़ में आए विशाल गुप्ता की शादी को 10 साल होने के बाद भी कोई संतान नही थी जिस कारण वह अपना और अपनी पत्नी का मेरठ के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहा था जहां पैसेन्ट कोर्डिनेटर का काम कर रही महिला ने दंपत्ति की जरुरत देख अन्य के साथ मिलकर कलियर जैसे भीड़भाड वाले इलाके से बच्चा चोरी का प्लान बनाया।
बच्चा बेचने में प्रॉफिट का खेल-
योजना के मुताबिक बच्चा चोरी करने में सफल होने पर अपनी पत्नी और दूसरी महिला को लेकर आस मोहम्मद लंगड़ा बुक की गई स्विफ्ट डिजायर के जरिए बच्चे सहित कलियर से फरार हो गया था। इन्होंने बच्चा तीन लाख में कंचन को और कंचन द्वारा तीन लाख नब्बे हजार में स्नेहा शर्मा को बच्चा बेचा गया। अन्त में स्नेहा शर्मा ने भी 01 लाख रुपये का प्रॉफिट कमाते हुए कुल चार लाख नब्बे हजार रुपये लेकर बच्चा विशाल गुप्ता के सुपुर्द कर दिया।
बच्चा सकुशल बरामद, परिजन के छलके आंसू
पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने शिशु को खरीददार विशाल गुप्ता के घर से सकुशल बरामद करते हुए तथा सभी आरोपियों को हिरासत में लिया। शिशु को सलामत देख परिजन सहित क्षेत्रवासियों ने हरिद्वार पुलिस के सशक्त नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।
नाम पता अभियुक्त
1-आस मोहम्मद लंगड़ा पुत्र शुकरूद्दीन नि0 कंचवाला पुल अहमद नगर मेरठ
2-मुमताज नि0 उपरोक्त
3-आसमां नि0 श्याम नगर मेरठ
4-कंचन तिवारी निवासी मेरठ
5-स्नेहा शर्मा नि0 शास्त्री नगर मेरठ
6-विशाल गुप्ता उर्फ अच्ची नि0 ककंरखेडा मेरठ
नोट- सभी महिलाओं के दिए गए नाम काल्पनिक हैं।
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