गलती पर माफी और माफी के बाद सेवा यही सच्ची मानवता है : हरक सिंह रावत
देहरादून। पिछले दिनों अनजाने में दिए वक्तव्य का हरक सिंह रावत ने आज गुरुद्वारे में जूता सेवा कर प्रायश्चित किया।
जब इंसान अपनी भूल स्वीकार कर विनम्रता से आगे बढ़ता है, तो वही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है।
हरक सिंह रावत जी ने आज गुरुद्वारे में सेवा कर सिख समाज से अनजाने में हुई भूल का परिशोधन किया।
यह कदम एकता, सम्मान और सद्भाव की मिसाल है।
सिख परंपरा हमें सिखाती है कि सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।
गलती पर माफी और माफी के बाद सेवा—यही सच्ची मानवता है।
सम्मान और सद्भाव का यह कदम स्वागतयोग्य है।
भूल स्वीकारने से बड़ा कोई साहस नहीं।
गुरुद्वारे में सेवा कर हरक सिंह रावतउन्होंने कहा ने सिख भाइयों से अनजाने में हुई भूल का प्रायश्चित किया।
मेरी समझ में अब इस मामले को और तूल नहीं दिया जाना चाहिए-
डॉ हरक सिंह रावत
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