बसपा के सरवत करीम को कम आंकना कांग्रेस को पड़ सकता है भारी
मंगलौर। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला रहता है। लेकिन हरिद्वार में कई विधानसभा ऐसी हैं जहां बसपा कांग्रेस व भाजपा को कड़ी टक्कर देती है। उत्तराखंड बनने के बाद मंगलोर सीट पर 3 बार बसपा ने जीत हासिल की है। जबकि 2017 के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी ने मंगलौर विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में मंगलौर सीट पर कांग्रेस और बसपा के बीच ही सीधी टक्कर देखने को मिलेगी। बसपा ने मंगलौर से हाजी सरवत करीम अंसारी को अपना प्रत्याशी बनाया है। हाजी सरवत करीम अंसारी 2012 में मंगलौर से बसपा के विधायक रह चुके हैं।
2012 में हाजी सरवत करीम अंसारी ने कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन को हराकर पहली बार विधायक बने थे। मंगलौर सीट में मुख्य मुकाबला हाजी और काजी के बीच ही रहता है। हाजी सरवत करीम अंसारी का ताल्लुक अंसारी समाज से है ।
चूंकि सरवत करीम अंसारी बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं इसलिए अंसारी समाज के साथ दलित समाज का वोट भी उन्हें मिलेगा जिसकी वजह से हाजी सरवत करीम अंसारी मजबूत स्थिति में है। हाजी सरवत करीम अंसारी मंगलौर विधानसभा के गांव गांव जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं और अपनी पार्टी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं यदि इस बार कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में सरवत करीम अंसारी को कम आंकने की भूल की तो कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है
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