March 3, 2026

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फूलदेई नई ऋतुओं का, नए फूलों के आने का संदेश लाने वाला ये त्योहार : श्री गर्ग

देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड प्रदेश किसान कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता विकास गर्ग ने कहा फूलदेई नई ऋतुओं का, नए फूलों के आने का संदेश लाने वाला ये त्योहार है।

विकास गर्ग ने कहा सर्दी और गर्मी के बीच का खूबसूरत मौसम, फ्यूंली, बुरांश और बासिंग के पीले, लाल, सफेद फूल और बच्चों के खिले हुए चेहरे… ‘फूलदेई’ से यही तस्वीरें सबसे पहले ज़ेहन में आती हैं। उत्तराखंड के पहाड़ों का लोक पर्व है । नए साल का, नई ऋतुओं का, नए फूलों के आने का संदेश लाने वाला ये त्योहार आज उत्तराखंड के गांवों और कस्बों में मनाया जा रहा है।

चैत्र के महीने की संक्रांति को, जब ऊंची पहाड़ियों से बर्फ पिघल जाती है, सर्दियों के मुश्किल दिन बीत जाते हैं, उत्तराखंड के पहाड़ बुरांश के लाल फूलों की चादर ओढ़ने लगते हैं, तब पूरे इलाके की खुशहाली के लिए फूलदेई का त्योहार मनाया जाता है। ये त्योहार आमतौर पर किशोरी लड़कियों और छोटे बच्चों का पर्व है।वक्त के साथ तरीके बदले, लेकिन अब भी ज़िंदा है परंपरा
फूल और चावलों को गांव के घर की देहरी, यानी मुख्यद्वार पर डालकर लड़कियां उस घर की खुशहाली की दुआ मांगती हैं। इस दौरान एक गाना भी गाया जाता है- फूलदेई, छम्मा देई…जतुकै देला, उतुकै सही…दैणी द्वार, भर भकार
फूलदेई के दिन लड़कियां और बच्चे सुबह-सुबह उठकर फ्यूंली, बुरांश, बासिंग और कचनार जैसे जंगली फूल इकट्ठा करते हैं।

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